पटना जिले की मसौढ़ी नगर परिषद को जुलाई 2025 में केंद्र सरकार की ओर से ODF Plus घोषित किया गया था। ODF यानी Open Defecation Free का अर्थ खुले में शौच से मुक्त क्षेत्र है, Masaurhi mein toilet ki problem जबकि ODF Plus का दायरा इससे आगे बढ़कर स्वच्छता व्यवस्था और ठोस-तरल कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं से भी जुड़ा है। लेकिन स्थानीय लोगों से बातचीत में सामने आई स्थिति इस सरकारी दावे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
Masaurhi mein toilet ki problem
मसौढ़ी में आज भी कई परिवारों के लिए शौचालय की सुविधा एक बड़ी समस्या बनी हुई है। खासकर गरीब परिवारों का कहना है कि उनके घरों में शौचालय नहीं है और उन्हें इसे बनवाने के लिए सरकारी आर्थिक सहायता भी नहीं मिली। वार्ड नंबर 1 के कुछ निवासियों ने बताया कि क्षेत्र में सामुदायिक शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि अगर क्षेत्र को ODF Plus घोषित किया गया है, तो जमीनी स्तर पर हर परिवार तक शौचालय की सुविधा क्यों नहीं पहुंची? लोगों का दावा है कि उनके घरों पर किसी निरीक्षण टीम ने आकर यह जांच नहीं की कि परिवार के पास वास्तव में शौचालय है या नहीं।


ODF Plus घोषणा पर स्थानीय लोगों के सवाल
कई निवासियों ने यह भी बताया कि उन्हें यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि ODF का मतलब क्या होता है। इससे यह सवाल उठता है कि स्वच्छता अभियान और ODF Plus की जानकारी आम लोगों तक कितनी पहुंची है।
ODF Plus का प्रमाणन केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुले में शौच की स्थिति समाप्त हो और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं जमीन पर मौजूद हों। यदि किसी गरीब परिवार के पास अपना शौचालय नहीं है और सार्वजनिक शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे परिवारों के लिए स्वच्छता व्यवस्था अभी भी अधूरी मानी जाएगी।
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वार्ड नंबर 1 की स्थिति बनी चिंता का विषय
वार्ड नंबर 1 के निवासियों के बयान इस पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ गरीब परिवार अभी भी शौचालय के बिना रह रहे हैं। उनका कहना है कि न तो सरकार की ओर से सामुदायिक शौचालय उपलब्ध कराया गया और न ही घर में शौचालय निर्माण के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली।


ऐसे में सवाल उठता है कि ODF Plus प्रमाणन से पहले क्या प्रत्येक वार्ड और प्रत्येक जरूरतमंद परिवार का वास्तविक सत्यापन किया गया था? यदि निरीक्षण हुआ था, तो शौचालय विहीन परिवारों की पहचान कैसे नहीं हुई?
प्रमाणन की पारदर्शिता जरूरी
इस मामले में प्रशासन और नगर परिषद के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम पारदर्शी सत्यापन होना चाहिए। प्रत्येक वार्ड में घर-घर सर्वे कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि कितने परिवारों के पास निजी शौचालय है, कितने परिवार सार्वजनिक शौचालय पर निर्भर हैं और किन परिवारों को सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
यदि जांच में कमियां सामने आती हैं, तो संबंधित परिवारों के लिए शौचालय निर्माण और सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए। साथ ही ODF Plus घोषित करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए सत्यापन रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने से लोगों के सवालों का जवाब मिल सकता है।


निष्कर्ष: मसौढ़ी को ODF Plus घोषित किया जाना स्वच्छता के लिहाज से सकारात्मक कदम है, लेकिन स्थानीय निवासियों की शिकायतें बताती हैं कि प्रमाणन और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की जांच जरूरी है। वार्ड नंबर 1 में शौचालय से वंचित परिवारों की स्थिति इस दावे की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन को स्वतंत्र और घर-घर सत्यापन कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मसौढ़ी का ODF Plus दर्जा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे।



