Bihar Zehreeli Sharab Se Maut: चार मौतों के बाद फिर उठे शराबबंदी और कानून-व्यवस्था पर सवाल

Bihar Zehreeli Sharab Se Maut के मामले में चार संदिग्ध मौतों के बाद बिहार में शराबबंदी, अवैध शराब और कानून-व्यवस्था को लेकर फिर सवाल उठे हैं। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर नजर।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद एक बार फिर Bihar Zehreeli Sharab Se Maut का मामला सामने आया है। पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव में चार युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चारों युवक एक साथ पार्टी कर रहे थे और कथित तौर पर शराब का सेवन करने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होने की बात कही गई है।

इस घटना ने बिहार की शराबबंदी नीति और अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। आधिकारिक बिहार सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, 5 अप्रैल 2016 की अधिसूचना के बाद राज्य में पूर्ण निषेध लागू किया गया।

लेकिन शराबबंदी के बावजूद समय-समय पर जहरीली या मिलावटी शराब से मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। अक्टूबर 2024 में भी बिहार में जहरीली शराब पीने से कम से कम 18 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई थी। उस मामले में अवैध शराब के वितरण से जुड़े होने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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बिहार में जहरीली शराब की घटनाओं का सबसे बड़ा उदाहरण दिसंबर 2022 की सारण/छपरा त्रासदी रही, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार को नोटिस भी जारी किया था। आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मौतों और शराब सेवन से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की थी।

बाद में NHRC से जुड़ी रिपोर्टिंग में आधिकारिक रूप से दर्ज मौतों और जांच में सामने आए आंकड़ों के बीच अंतर, कुछ शवों के पोस्टमार्टम के बिना अंतिम संस्कार तथा जांच में प्रशासनिक सहयोग से जुड़े गंभीर सवालों का उल्लेख किया गया। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जहरीली शराब की प्रत्येक बड़ी घटना में जांच कितनी पारदर्शी और प्रभावी होती है।

Bihar Zehreeli Sharab Se Maut

हालिया बाढ़ मामले में भी स्थानीय लोगों ने जहरीली शराब को मौत की वजह बताया है, लेकिन यह आरोप अभी जांच के दायरे में है। चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने और पुलिस-प्रशासन द्वारा मामले की जांच किए जाने की रिपोर्ट है। इसलिए पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष आने से पहले मौत का अंतिम कारण तय करना उचित नहीं होगा।

विपक्ष ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। विपक्ष की ओर से सरकार की कानून-व्यवस्था और शराबबंदी के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी राजनीतिक दल के आरोप को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

Bihar Zehreeli Sharab Se Maut

असल चुनौती यह है कि शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की सप्लाई कैसे जारी रहती है। जहरीली शराब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और गरीब परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अवैध शराब में जहरीले रसायनों की मिलावट होने पर कुछ ही समय में गंभीर बीमारी, आंखों की रोशनी जाने और मौत तक का खतरा पैदा हो सकता है।

Bihar Zehreeli Sharab Se Maut की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल छापेमारी और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। अवैध शराब की सप्लाई चेन, उत्पादन, वितरण और संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। साथ ही प्रत्येक संदिग्ध मौत में पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक जांच और सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जांच रिपोर्ट सामने आनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

Nishant Ram
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