बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब की तस्करी और अवैध बिक्री से जुड़े मामले लगातार सामने आते रहते हैं। ताजा मामला समस्तीपुर रेलवे स्टेशन से सामने आया है, जहां रेलवे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में ट्रेन के AC First Class कोच से बड़ी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की गई। इस मामले ने एक बार फिर Bihar mein sharabbandi को लेकर बहस तेज कर दी है कि कानून लागू होने के बावजूद शराब राज्य के अंदर पहुंच कैसे रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, समस्तीपुर जंक्शन पर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस की जांच के दौरान RPF, GRP और CIB की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। ट्रेन के H-1 कोच में एक संदिग्ध बैग की तलाशी लेने पर उसमें छिपाकर रखी गई विदेशी शराब बरामद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 75 लीटर शराब जब्त की गई और एक 25 वर्षीय महिला समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया।
बिहार में शराबबंदी का कानून क्या कहता है?
बिहार में शराबबंदी को लागू करने के लिए Bihar Prohibition and Excise Act, 2016 बनाया गया। इस कानून का उद्देश्य राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, भंडारण, खरीद और सेवन पर रोक लगाना है। कानून के तहत शराब को बिना वैध अनुमति के राज्य में लाना या उसके माध्यम से परिवहन करना भी प्रतिबंधित है।
यानी Bihar mein sharabbandi सिर्फ शराब पीने पर रोक तक सीमित नहीं है। शराब की तस्करी, बिक्री, खरीद, परिवहन और भंडारण भी कानून के दायरे में आते हैं। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में शराब की बरामदगी के मामलों में पुलिस और उत्पाद विभाग कानूनी कार्रवाई करते हैं।
Advertisement


AC First Class में शराब मिलने से उठे सवाल
समस्तीपुर की घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शराब को सामान्य यात्री डिब्बे के बजाय AC First Class कोच के जरिए ले जाया जा रहा था। इससे यह सवाल उठता है कि तस्कर शराब को बिहार तक पहुंचाने के लिए अब अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था।
हालांकि किसी आरोपी के दोषी होने का अंतिम फैसला अदालत करती है। पुलिस द्वारा हिरासत या गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करती।
शराबबंदी के बावजूद तस्करी क्यों जारी?
बिहार की भौगोलिक स्थिति भी शराब की अवैध सप्लाई रोकने में चुनौती पैदा करती है। राज्य की सीमाएं कई ऐसे राज्यों से लगती हैं जहां शराब पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। विशेषज्ञ विश्लेषणों में भी पड़ोसी राज्यों से बिहार में शराब की अवैध आवाजाही को शराबबंदी लागू करने की प्रमुख चुनौतियों में गिना गया है।
समस्तीपुर की यह कार्रवाई दिखाती है कि कानून लागू होने के बावजूद प्रवर्तन एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन, ट्रेन और सड़क मार्ग शराब तस्करी रोकने के लिए महत्वपूर्ण जांच बिंदु बने हुए हैं।
Bihar mein sharabbandi एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा है। सरकार की नीति शराब पर प्रतिबंध बनाए रखने की है, जबकि जमीन पर सामने आने वाले तस्करी के मामले यह सवाल जरूर खड़े करते हैं कि प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी और प्रवर्तन को और कितना मजबूत किया जाना चाहिए।



