झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन इन दिनों बड़ा मुद्दा बन गया है। Jharkhand Student Protest के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL 2024 परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके साथ ही निजी एजेंसी TDPL द्वारा 2014 से कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया है।
24 से 26 दिन तक चला छात्रों का आंदोलन
रांची में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों तक चला। रिपोर्टों के अनुसार JPSC-JSSC Reforms Manch के नेतृत्व में छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे।
इस आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल भी की। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल के बाद सरकार के फैसले के बाद अपना अनशन समाप्त किया।
सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा क्यों रद्द की?
17 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। सरकार ने TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं, प्रकाशित परिणामों और चयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला बताया। यह फैसला छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल था।
सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की बात भी कही गई है। मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान सामने आए कुछ गंभीर पहलुओं का उल्लेख किया, हालांकि जांच से जुड़े सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
TDPL को लेकर क्या विवाद है?
TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited को झारखंड में कई भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा आउटसोर्स एजेंसी बताया गया है। सरकार के फैसले के अनुसार 2014 से TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे संबंधित परिणामों तथा चयन प्रक्रियाओं को भी कार्रवाई के दायरे में रखा गया है।
इस फैसले के बाद परीक्षा व्यवस्था में एजेंसियों की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं।
सफल उम्मीदवारों में भी नाराजगी
JSSC-CGL रद्द होने के बाद मामला केवल प्रदर्शन कर रहे छात्रों तक सीमित नहीं रहा। परीक्षा में सफल होकर नौकरी पाने वाले कुछ उम्मीदवारों ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को नुकसान नहीं होना चाहिए।
इस तरह झारखंड में एक तरफ परीक्षा सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग है, वहीं दूसरी तरफ सफल अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
परीक्षा सुधार के लिए बनेगी कमेटी
सरकार ने JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक समिति बनाने का भी निर्णय लिया है। रिपोर्ट के अनुसार समिति परीक्षा व्यवस्था का व्यापक अध्ययन करेगी और सुधार से संबंधित सुझाव सरकार को देगी। इसके अलावा JPSC और JSSC में Internal Monitoring Cell बनाने की भी बात सामने आई है।
आंदोलन फिलहाल स्थगित
19 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार छात्रों ने 26 दिनों के आंदोलन के बाद फिलहाल प्रदर्शन स्थगित कर दिया और सरकार को अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए 60 दिन का समय दिया। हालांकि CBI जांच जैसी कुछ मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि Jharkhand Student Protest ने राज्य की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा दबाव बनाया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है, परीक्षा प्रणाली में क्या सुधार किए जाते हैं और प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को कैसे सुरक्षित किया जाता है।



