सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Oath के तौर पर शपथ ली। शपथ लेने के बाद, उन्हें सदन में विपक्ष का नेता फिर से नियुक्त किया गया। इस कदम से संसद के उच्च सदन में कांग्रेस के नेतृत्व में निरंतरता बनी रहेगी।
शपथ सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई। खड़गे हाल ही में कर्नाटक से राज्यसभा के लिए फिर से चुने गए थे। उनका पिछला कार्यकाल 25 जून को खत्म हो गया था; इसलिए, तकनीकी रूप से वे 26 जून से लेकर दोबारा चुने जाने तक विपक्ष के नेता नहीं थे। हालांकि, दोबारा चुने जाने के बाद उन्हें इस पद पर फिर से नियुक्त किया गया।


विपक्ष के नेता की नियुक्ति संसद में विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 के तहत होती है। इस अधिनियम के तहत, सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता नामित किया जा सकता है।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Oath समारोह के दौरान, आठ नवनिर्वाचित सदस्यों ने भी अपने पद की शपथ ली। इस समूह में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल थे। संसदीय सत्र से पहले इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ, उच्च सदन अब बिना किसी नेतृत्व संबंधी बाधा के अपनी कार्यवाही आगे बढ़ा सकता है।
शपथ लेने के बाद, मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदस्य के तौर पर फिर से सेवा करने का मौका मिलना गर्व और जिम्मेदारी, दोनों की बात है। उन्होंने कहा कि वे संविधान, लोकतंत्र और जनता के प्रति प्रतिबद्ध नेता हैं। उन्होंने संसदीय बहसों और लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने का अपना संकल्प भी दोहराया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मैदान में उतरे हैं। वे 2021 से समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता रहे हैं। उनके नेतृत्व में, कांग्रेस ने उच्च सदन में सरकारी नीतियों, लोकतंत्र और राष्ट्रीय संपत्तियों पर अपना रुख स्पष्ट करने की कोशिश की है।


विपक्ष के नेता का पद केवल दिखावटी नहीं होता; इस पद पर रहने वाला नेता संसद में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाता है, बहसों के लिए रणनीतियां बनाता है और चुने हुए संवैधानिक प्रतिनिधियों के बीच अहम भूमिका निभाता है। इसलिए, इस भूमिका के लिए खड़गे की नियुक्ति को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कुल मिलाकर, विपक्ष के नेता के तौर पर खड़गे की नियुक्ति कांग्रेस पार्टी के संसदीय नेतृत्व में निरंतरता सुनिश्चित करती है। आगामी संसदीय सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर बहस होने की उम्मीद है, ऐसे में खड़गे की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।



