Telangana Urdu Language Issue: तेलंगाना के निज़ामाबाद ज़िले के परकिट गांव में एक प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूल में उर्दू पढ़ाने के मुद्दे पर विवाद हो गया है। स्कूल कैंपस में हंगामा हुआ, पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज की गईं। पूरा मामला अब पुलिस जांच में है।
क्या हुआ पूरा मामला?
शनिवार को कुछ लोग भारत चंद्र स्कूल पहुंचे और विरोध करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्कूल ने एजुकेशन डिपार्टमेंट की परमिशन के बिना और पेरेंट्स को बताए बिना उर्दू क्लास शुरू कर दी हैं।
Telangana Urdu Language Issue स्कूल कैंपस में बहस बढ़ गई। आरोप है कि कुछ लोग ज़बरदस्ती स्कूल में घुस गए और तोड़फोड़ की। घटना के बाद पुलिस को बताया गया।
पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ केस दर्ज किए
आर्मर पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों पर FIR दर्ज की है।
पहली FIR BJP टाउन प्रेसिडेंट एम.के. बालू और उनके कुछ साथियों पर दर्ज की गई। केस में ज़बरदस्ती घुसने, मारपीट और स्कूल के सामान को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं।
दूसरी FIR स्कूल प्रिंसिपल आमिर खान, टीचर हुमा और स्कूल कॉरेस्पोंडेंट मल्लैया के खिलाफ दर्ज की गई है। उन पर बिना सरकारी परमिशन के उर्दू पढ़ाने का आरोप है।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।
उर्दू भाषा का लीगल स्टेटस
तेलंगाना सरकार ने 2017 में उर्दू को राज्य की दूसरी ऑफिशियल भाषा का दर्जा दिया है। इसका मतलब है कि उर्दू को ऑफिशियल लेवल पर मान्यता मिल गई है।
लेकिन अगर कोई प्राइवेट स्कूल कोई नई भाषा या नया सब्जेक्ट शुरू करना चाहता है, तो उसे डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से परमिशन लेनी होगी। अब जांच का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि स्कूल को मंज़ूरी मिली या नहीं।
दोनों तरफ से अलग-अलग दावे
प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं किया गया और पेरेंट्स से सलाह नहीं ली गई।
दूसरी तरफ, स्कूल मैनेजमेंट का मानना है कि उर्दू पढ़ाना गलत नहीं है, लेकिन पूरे मामले की सही जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।
इस वजह से पुलिस अभी कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं ले रही है। अधिकारी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं और इसमें शामिल लोगों से पूछताछ कर रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अगर जांच में यह साबित होता है कि स्कूल बिना इजाज़त के उर्दू पढ़ा रहा था, तो शिक्षा विभाग नियमों के मुताबिक कार्रवाई कर सकता है।
अगर स्कूल में घुसने, तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप सही साबित होते हैं, तो विरोध करने वालों पर कानून के मुताबिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है।
यह मामला दिखाता है कि शिक्षा से जुड़े कोई भी बदलाव करने से पहले सरकारी नियमों का पालन करना ज़रूरी है। साथ ही, झगड़े कानून के दायरे में सुलझाने चाहिए, न कि हंगामा या हिंसा का सहारा लेना चाहिए।
नतीजा
निज़ामाबाद मामले की अब पुलिस जांच कर रही है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन बिना किसी भेदभाव के जांच करके सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रहा है।



