हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 25 Sugar Mills in Bihar के पूर्णिया में एक सभा के दौरान कहा कि आने वाले पाँच सालों में राज्य में 25 नई चीनी मिलें लगाई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक चीनी मिल बनमनखी इलाके में लगाई जाएगी। यह खबर सुनकर राज्य के किसानों और युवाओं में उम्मीद की लहर दौड़ गई, क्योंकि बिहार कभी चीनी उद्योग के लिए जाना जाता था।
लेकिन जब इस दावे की सच्चाई जांची गई, तो पता चला कि यह वादा “25 Sugar Mills in Bihar” फिलहाल केवल घोषणा के रूप में किया गया है। किसी भी सरकारी दस्तावेज़ या आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में “25 चीनी मिलें” लगाने की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है। न ही “बनमनखी” में नई चीनी मिल स्थापित करने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने आया है। केवल कुछ समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया पोस्टों में इस बयान का जिक्र किया गया है।

यह सच है कि बिहार में पहले लगभग 30 से ज़्यादा चीनी मिलें चलती थीं, लेकिन धीरे-धीरे ज़्यादातर बंद हो गईं। आज भी किसान गन्ना तो उगाते हैं, पर उन्हें सही दाम नहीं मिलता क्योंकि मिलें बंद हैं। अगर सरकार सच में इन मिलों को दोबारा शुरू करती है या नई मिलें लगाती है, तो इससे राज्य के लाखों किसानों और मजदूरों को बड़ा फायदा होगा। रोजगार के नए अवसर बनेंगे और बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
फिलहाल यह 25 Sugar Mills in Bihar मे कहना जल्दबाज़ी होगी कि ये 25 चीनी मिलें कब और कहाँ लगेंगी। सरकार को इसके लिए जमीन, पूंजी, मशीनरी और निवेशकों की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, पहले की बंद पड़ी मिलों को चालू करने में भी काफी पैसा और समय लगेगा। इसलिए जनता को इस वादे को एक उम्मीद के रूप में देखना चाहिए, न कि पक्के फैसले के रूप में।
निष्कर्ष:
अमित शाह का यह बयान किसानों के लिए उम्मीद भरा है, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जब तक सरकार इसकी ठोस योजना, बजट और निर्माण कार्य शुरू नहीं करती, तब तक इसे केवल एक राजनीतिक घोषणा ही माना जाएगा। अगर यह वादा सच होता है, तो यह बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।



